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Bahraich Wolf Attack के तहत उत्तर प्रदेश के बहराइच में आदमखोर भेड़ियों को देखते ही मारने के आदेश किस कानून के तहत जारी किए गए हैं? जानिए पूरी जानकारी।

By: admin

On: Thursday, September 5, 2024 3:20 PM

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Bahraich Wolf Attack के मामले में बहराइच में आदमखोर भेड़ियों के हमलों की संख्या बढ़ने के कारण अधिकारियों ने सुरक्षा के कड़े कदम उठाए हैं। बहराइच में आदमखोर भेड़ियों के हमले से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं। इन घटनाओं से बहराइच के ग्रामीण क्षेत्रों में भय का माहौल बन गया है। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इन्हें मारने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश Wildlife Protection Act, 1972 के तहत दिए गए हैं।

आइए, इस लेख में विस्तार से समझते हैं कि Wildlife Protection Act, 1972 के तहत भेड़ियों को मारने का आदेश कैसे और क्यों जारी किया गया, और इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के बारे में भी जानकारी प्राप्त करते हैं।

बहराइच में भेड़ियों का आतंक

बहराइच के महसी तहसील क्षेत्र में आदमखोर भेड़ियों ने पिछले कुछ महीनों से तबाही मचा रखी है। मार्च 2024 से शुरू हुए इन हमलों में भेड़ियों के झुंड ने 10 लोगों की जान ली और 35 से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। बहराइच के करीब 50 गांवों में भेड़ियों के हमलों के चलते लोगों में भारी दहशत है। लोग रात में पहरा देने को मजबूर हैं, और कुछ ने अपने बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है।

ऑपरेशन भेड़िया: भेड़ियों को पकड़ने की मुहिम

Bahraich Wolf Attack के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘ऑपरेशन भेड़िया’ शुरू किया है। वन विभाग की टीमें ड्रोन कैमरों, इन्फ्रारेड कैमरों और थर्मल इमेजिंग कैमरों का उपयोग करके भेड़ियों को पकड़ने की कोशिश कर रही हैं। इस ऑपरेशन की निगरानी स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। इस अभियान के तहत अब तक चार भेड़ियों को पकड़ा जा चुका है, लेकिन अभी भी कई भेड़ियों को पकड़ना बाकी है।

गोली मारने के आदेश: किस कानून के तहत?

भेड़ियों को देखते ही गोली मारने के आदेश Wildlife Protection Act, 1972 के तहत जारी किए गए हैं। इस अधिनियम की धारा 11 के अंतर्गत यदि कोई जंगली जानवर मानव जीवन के लिए खतरा बन जाता है, तो उसे मारने की अनुमति दी जा सकती है। यह आदेश तभी जारी किया जाता है जब उस जानवर को पकड़ने, शान्त करने या स्थानांतरित करने के सभी प्रयास असफल हो जाते हैं।

धारा 11 (क) के अनुसार, यदि मुख्य वन्यजीव संरक्षक यह निर्णय लेता है कि किसी वन्यप्राणी को पकड़ा नहीं जा सकता या स्थानांतरित नहीं किया जा सकता, तो उसे मारने का आदेश दिया जा सकता है। बहराइच में भेड़ियों के लगातार हमलों के बाद, यह आदेश जारी किया गया है ताकि ग्रामीणों की जान को बचाया जा सके।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अन्य प्रावधान

Wildlife Protection Act, 1972 के तहत सभी वन्यजीवों की सुरक्षा का प्रावधान है। किसी भी संरक्षित प्राणी को मारने, पकड़ने या परेशान करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। इसके तहत भेड़िया जैसे संरक्षित जानवर को मारने या नुकसान पहुंचाने पर तीन साल की कैद या 25,000 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को दोबारा इसी अपराध में दोषी पाया जाता है तो सजा सात साल तक बढ़ाई जा सकती है।

इसके अलावा, Indian Penal Code (IPC) की धारा 325 के तहत किसी भी जीव को नुकसान पहुंचाने पर पांच साल तक की कैद और/या जुर्माने का प्रावधान है।

किस आधार पर गोली मारने का आदेश जारी किया जाता है?

किसी भी जंगली जानवर को मारने का आदेश तभी दिया जाता है जब वन विभाग यह तय कर लेता है कि उसे पकड़ना असंभव है और वह मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। बहराइच में जारी आदेशों के अनुसार, भेड़ियों को पकड़ने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे, लेकिन यदि भेड़िए बस्तियों में प्रवेश करते हैं और लोगों की जान को खतरा होता है, तो उन्हें गोली मारी जाएगी।

निष्कर्ष

Bahraich Wolf Attack के तहत भेड़ियों को मारने के आदेश Wildlife Protection Act, 1972 के तहत जारी किए गए हैं, जो स्पष्ट करता है कि जब जंगली जानवर मानव जीवन के लिए खतरा बन जाते हैं, तो उन्हें मारने का अंतिम उपाय अपनाया जा सकता है। हालांकि, भेड़ियों को मारने से पहले सभी उपाय किए जा रहे हैं ताकि उन्हें पकड़ा जा सके और मानव जीवन को सुरक्षित किया जा सके।

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My Name is Suhel Shaikh, I Work as a Content Writer for Kararinews and I like Writing Articles
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